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रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर के प्रकार

पेट के पीछे किडनी और बड़ी नसों के पास एक बड़ा ट्यूमर
रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर पेट के पीछे, किडनी और बड़ी रक्त-नलियों के पास बढ़ते हैं।
ट्यूमरजानकारी
सॉफ़्ट-टिशू सारकोमा (जैसे लाइपोसारकोमा)इस जगह के सबसे आम मूल कैंसर वाले ट्यूमर
पैरागैंग्लियोमा और एड्रिनल ट्यूमरऐसे हार्मोन बना सकते हैं जो ब्लड प्रेशर पर असर डालें
श्वानोमा और नसों के आवरण के अन्य ट्यूमरआमतौर पर कैंसर नहीं (बिनाइन)
बढ़ी हुई लिम्फ नोड्सलिम्फोमा से, या टेस्टिकुलर व अन्य कैंसरों के फैलाव से
कीमोथेरेपी के बाद बची गाँठेंख़ासकर टेस्टिकुलर कैंसर के इलाज के बाद

लक्षण

यह जगह गहरी और खुली होती है, इसलिए ये ट्यूमर अक्सर लक्षण आने से पहले बड़े हो जाते हैं। लक्षण हों तो इनमें पेट भरा-भरा लगना, गाँठ महसूस होना, कमर दर्द, पैरों में सूजन, या हार्मोन बनाने वाले ट्यूमर में बार-बार हाई ब्लड प्रेशर, धड़कन तेज़ होना और पसीना आना शामिल हैं। कई ट्यूमर संयोग से स्कैन में मिलते हैं।

इलाज से पहले की जाँच

कॉन्ट्रास्ट CT या MRI से ट्यूमर और किडनी, बड़ी नसों, आँतों व मांसपेशियों से उसका संबंध साफ़ होता है। जब एड्रिनल या पैरागैंग्लियोमा की आशंका हो, तो हार्मोन की जाँच की जाती है, क्योंकि ऐसे ट्यूमर में सर्जरी से पहले ख़ास तैयारी चाहिए।

बायोप्सी का फ़ैसला सोच-समझकर लिया जाता है। जब लिम्फोमा या सारकोमा की आशंका हो और इलाज बदल सकता हो, तो कोर नीडल बायोप्सी मदद करती है, लेकिन पैरागैंग्लियोमा की आशंका में इससे बचना चाहिए। किसी भी प्रक्रिया से पहले पूरी योजना बनाने से ट्यूमर को पूरी तरह निकालने की सबसे अच्छी संभावना रहती है।

इलाज का तरीका

पूरा निकालना

ज़्यादातर मूल ट्यूमर में सर्जरी का लक्ष्य ट्यूमर को स्वस्थ हिस्से के किनारे के साथ एक ही टुकड़े में निकालना होता है।

अंग और नसें बचाना

जहाँ कैंसर नियंत्रण पर असर न पड़े, वहाँ किडनी, नसें और नर्व्स बचाई जाती हैं।

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी

चुने हुए छोटे, साफ़ किनारों वाले ट्यूमर रोबोटिक या लैप्रोस्कोपिक तरीके से निकाले जा सकते हैं।

कई विशेषज्ञों की टीम

रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी मिलकर तय करते हैं कि आगे इलाज की ज़रूरत है या नहीं।

रिकवरी और फ़ॉलो-अप

रिकवरी ऑपरेशन के आकार पर निर्भर करती है, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बाद कुछ दिनों से लेकर बड़ी ओपन सर्जरी के बाद कुछ हफ़्तों तक। कुछ ट्यूमर, ख़ासकर लाइपोसारकोमा, कई साल बाद उसी जगह दोबारा हो सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक स्कैन से फ़ॉलो-अप ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर हमेशा कैंसर होते हैं?

नहीं। कई, जैसे श्वानोमा, कैंसर नहीं होते, जबकि सारकोमा जैसे दूसरे ट्यूमर कैंसर होते हैं। स्कैन और कभी-कभी बायोप्सी से फ़र्क़ पता चलता है।

क्या पहले बायोप्सी करानी चाहिए?

यह स्कैन के संकेत पर निर्भर करता है। जब बायोप्सी से इलाज बदल सकता हो तब यह मदद करती है, लेकिन कुछ ट्यूमर में इससे बचा जाता है। यह फ़ैसला किसी भी प्रक्रिया से पहले सर्जिकल टीम के साथ लेना सबसे अच्छा है।

क्या ये ट्यूमर रोबोट से निकाले जा सकते हैं?

चुने हुए छोटे, साफ़ किनारों वाले ट्यूमर निकाले जा सकते हैं। कई अंगों तक फैले बड़े ट्यूमर में आमतौर पर ओपन सर्जरी चाहिए।

क्या मेरी किडनी निकल जाएगी?

ज़रूरी नहीं। जहाँ ट्यूमर को पूरी तरह निकालने पर असर न पड़े, वहाँ किडनी बचाई जाती है।

लंबे फ़ॉलो-अप की ज़रूरत क्यों है?

कुछ ट्यूमर, ख़ासकर लाइपोसारकोमा, सालों बाद दोबारा हो सकते हैं, इसलिए समय-समय पर स्कैन की सलाह दी जाती है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बाद कुछ दिनों से लेकर बड़ी ओपन सर्जरी के बाद कई हफ़्तों तक।

पेट के पीछे गाँठ का पता चला है?

किसी भी बायोप्सी या सर्जरी से पहले योजना पर राय लें। स्कैन क्लिनिक में या वीडियो पर देखे जा सकते हैं।

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