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ब्लैडर कैंसर एक नज़र में

ब्लैडर का कटा हुआ चित्र, जिसकी अंदरूनी परत से ट्यूमर निकल रहा है
ज़्यादातर ब्लैडर कैंसर ब्लैडर की अंदरूनी परत से शुरू होते हैं।

खून सबसे बड़ा संकेत

पेशाब में बिना दर्द के, कभी-कभी आने वाले खून की जाँच हमेशा करानी चाहिए।

तंबाकू सबसे बड़ा कारण

तंबाकू सबसे बड़ा जोखिम है, बीड़ी और चबाने वाला तंबाकू भी।

अक्सर जल्दी पकड़ में आता है

लगभग हर चार में से तीन ट्यूमर पहचान के समय ब्लैडर की मांसपेशी तक नहीं पहुँचे होते।

फ़ॉलो-अप ज़रूरी है

ब्लैडर ट्यूमर दोबारा हो सकते हैं, इसलिए नियमित सिस्टोस्कोपी इलाज का हिस्सा है।

चेतावनी के संकेत और जोखिम के कारण

  • पेशाब में दिखने वाला खून, जो आता-जाता रहे
  • पेशाब की सामान्य जाँच में लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC) मिलना
  • बिना इन्फ़ेक्शन के बार-बार पेशाब, जल्दी लगना या जलन

धूम्रपान के अलावा डाई (रंग), रबर, चमड़ा, पेंट और औद्योगिक रसायनों के लंबे संपर्क से, पहले पेल्विस में हुए रेडिएशन से और कुछ कीमोथेरेपी दवाओं से भी ख़तरा बढ़ता है। अगर खून सिर्फ़ पेशाब की जाँच में मिला है, तो माइक्रोहीमेच्यूरिया चेकर (अंग्रेज़ी में) बताता है कि आमतौर पर कितनी जाँच की सलाह दी जाती है।

ब्लैडर कैंसर की पहचान कैसे होती है

सिस्टोस्कोपी

लोकल एनेस्थेटिक जेल लगाकर एक पतली, मुड़ने वाली दूरबीन ब्लैडर में डाली जाती है। इसमें कुछ मिनट लगते हैं और ब्लैडर ट्यूमर देखने का यह सबसे भरोसेमंद तरीका है; स्कैन में छोटे या सपाट घाव छूट सकते हैं।

CT यूरोग्राफ़ी और यूरिन साइटोलॉजी

कॉन्ट्रास्ट CT किडनी और यूरेटर में ट्यूमर और पथरी की जाँच करता है, और यूरिन साइटोलॉजी पेशाब में कैंसर कोशिकाएँ ढूँढती है, ख़ासकर हाई ग्रेड बीमारी में।

TURBT

ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन में मूत्रनली के रास्ते, बिना चीरे के ट्यूमर निकाला जाता है और जाँच के लिए ऊतक मिलता है। अच्छे रिसेक्शन में ब्लैडर की मांसपेशी का हिस्सा भी शामिल होता है, ताकि पता चले कि ट्यूमर कितना गहरा है। कुछ ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर में कुछ हफ़्तों बाद दूसरा रिसेक्शन करना पड़ता है।

स्टेज और ग्रेड

स्टेजमतलबआमतौर पर इलाज
Taअंदरूनी परत तक सीमितTURBT और कीमोथेरेपी की एक खुराक ब्लैडर में; हाई ग्रेड हो तो BCG
CISपरत में सपाट, हाई ग्रेड बदलावBCG
T1परत के नीचे वाली सतह तकदोबारा TURBT और BCG; चुने हुए ज़्यादा जोखिम वाले मामलों में जल्दी सिस्टेक्टॉमी
T2ब्लैडर की मांसपेशी तककीमोथेरेपी, फिर रेडिकल सिस्टेक्टॉमी, या ट्राइमोडैलिटी थेरेपी
T3–T4ब्लैडर की दीवार के बाहरऑन्कोलॉजी के साथ मिलकर कई तरह का इलाज

ग्रेड बताता है कि कोशिकाएँ कितनी असामान्य दिखती हैं। लो ग्रेड ट्यूमर दोबारा हो सकते हैं पर शायद ही गहराई में जाते हैं; हाई ग्रेड ट्यूमर के बढ़ने का ख़तरा ज़्यादा होता है और उनमें ज़्यादा गहन इलाज चाहिए। EORTC रिस्क टेबल (अंग्रेज़ी में) इन बातों को मिलाकर दोबारा होने और बढ़ने के जोखिम का अनुमान देती हैं।

इलाज के विकल्प

मांसपेशी तक न पहुँचा कैंसर (नॉन-मसल-इनवेसिव)

TURBT के बाद कम जोखिम वाले ट्यूमर में आमतौर पर ब्लैडर में कीमोथेरेपी की एक खुराक दी जाती है। मध्यम जोखिम वाले ट्यूमर में कई खुराकों का कोर्स लग सकता है (ब्लैडर में कीमोथेरेपी: क्या उम्मीद करें)। ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर का इलाज BCG से होता है, जो छह हफ़्ते तक हर हफ़्ते और फिर एक से तीन साल तक मेंटेनेंस के रूप में दिया जाता है। BCG इलाज: क्या उम्मीद करें।

मांसपेशी तक पहुँचा कैंसर (मसल-इनवेसिव)

मानक इलाज है पहले कीमोथेरेपी, फिर रोबोटिक रेडिकल सिस्टेक्टॉमी, जिसमें ब्लैडर और पेल्विस के लिम्फ नोड्स निकाले जाते हैं। सावधानी से चुने गए मरीज़ों में ट्राइमोडैलिटी थेरेपी (पूरा TURBT, फिर कीमोथेरेपी और रेडिएशन) से ब्लैडर बचाया जा सकता है।

जब BCG काम न करे

अगर पूरा BCG लेने के बाद भी ज़्यादा जोखिम वाली बीमारी लौट आए, तो आमतौर पर रेडिकल सिस्टेक्टॉमी की सलाह दी जाती है। जो मरीज़ सर्जरी के लायक नहीं हैं, उनके लिए ब्लैडर बचाने वाली नई दवाओं पर विचार किया जा सकता है।

सिस्टेक्टॉमी के बाद जीवन: यूरिनरी डायवर्ज़न

इलियल कंड्यूट

आँत का एक छोटा हिस्सा पेशाब को पेट पर बने छोटे छेद (स्टोमा) तक ले जाता है, जहाँ से पेशाब एक छोटे बैग में जाता है। यह सबसे आसान और सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है।

नियोब्लैडर

आँत से बनी नई थैली को मूत्रनली से जोड़ा जाता है, ताकि पेशाब सामान्य रास्ते से हो। इसके लिए अच्छी किडनी कार्यक्षमता और ब्लैडर ट्रेनिंग के प्रति प्रतिबद्धता चाहिए।

रिकवरी और फ़ॉलो-अप

TURBT के बाद कुछ दिन हल्की जलन और पेशाब में थोड़ा खून आम है। BCG के दौरान हर खुराक के बाद एक-दो दिन फ़्लू जैसे लक्षण होना अपेक्षित है। निगरानी के लिए सिस्टोस्कोपी नियमित अंतराल पर दोहराई जाती है, ख़ासकर पहले दो सालों में, और समय-समय पर किडनी व यूरेटर की इमेजिंग होती है।

सिस्टेक्टॉमी के बाद रिकवरी में कई हफ़्ते लगते हैं। फ़ॉलो-अप में स्कैन, किडनी फ़ंक्शन, विटामिन B12 और स्टोमा या नियोब्लैडर में मदद शामिल है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खून आना अपने-आप बंद हो गया। क्या फिर भी जाँच ज़रूरी है?

हाँ। ब्लैडर ट्यूमर से आने वाला खून अक्सर रुकता है और फिर लौट आता है। खून रुक जाने का मतलब यह नहीं कि उसका कारण ख़त्म हो गया।

क्या सिस्टोस्कोपी में दर्द होता है?

फ़्लेक्सिबल सिस्टोस्कोपी लोकल एनेस्थेटिक जेल लगाकर होती है और आमतौर पर कुछ मिनट लगते हैं। ज़्यादातर लोग इसे दर्द नहीं, बल्कि हल्की असुविधा बताते हैं।

BCG क्या है और कैसे काम करता है?

BCG एक कमज़ोर किया हुआ बैक्टीरिया है जिसे कैथेटर से ब्लैडर में डाला जाता है। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रतिक्रिया को जगाता है, जिससे ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर के दोबारा होने या बढ़ने का ख़तरा कम होता है।

क्या मेरा ब्लैडर निकालना पड़ेगा?

ज़्यादातर ब्लैडर कैंसर के मरीज़ों में नहीं। ब्लैडर निकालने की सलाह मांसपेशी तक पहुँची बीमारी में, और कुछ ऐसे ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर में दी जाती है जिन पर BCG असर न करे।

क्या यूरोस्टोमी बैग के साथ सामान्य जीवन जी सकते हैं?

हाँ। ज़्यादातर लोग काम, यात्रा और सामान्य गतिविधियों पर लौट आते हैं। आधुनिक बैग दिखते नहीं हैं, और स्टोमा नर्स आदत डालने में मदद करती हैं।

क्या लखनऊ में ब्लैडर कैंसर का पूरा इलाज उपलब्ध है?

हाँ। सिस्टोस्कोपी, TURBT, BCG, रोबोटिक रेडिकल सिस्टेक्टॉमी और लंबी निगरानी, सब कुछ लखनऊ में डॉ. अंशुमान सिंह के पास उपलब्ध है।

मरीज़ों के कैलकुलेटर

अपनी रिपोर्ट समझें

चाहे पेशाब की सामान्य जाँच में खून मिला हो, या आप TURBT के बाद इलाज की योजना बना रहे हों, ये गाइडलाइन-आधारित टूल बातचीत की तैयारी में मदद करते हैं। ये अभी अंग्रेज़ी में हैं।

मरीज़ों के अनुभव

डॉ. अंशुमान सिंह से इलाज करा चुके मरीज़ों और परिवारों के अपने शब्दों में (मूल अंग्रेज़ी में)।

“

I was diagnosed with a tumor in my urinary bladder, and my treatment was done at Medanta Hospital, Gurgaon, under the care of Uro-Oncology specialists Dr. Gagan Gautam and Dr. Anshuman Singh. Today, I am completely tumor-free.

AK
Abhay Kumar DubeyPatient
“

He is highly qualified doctor, he is best in uro- oncology. I have personal experience about him during my father treatment for Urine bladder cancer at medanta hospital. And my father is fine now.

SM
Shiksha MishraFamily Member

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