
पेशाब में खून देखना डरावना होता है, और यह डर बेवजह नहीं है: यह ब्लैडर कैंसर और किडनी कैंसर के सबसे आम शुरुआती संकेतों में से एक है। ज़्यादातर मामलों में इसका कारण आसान निकलता है, जैसे इन्फ़ेक्शन या पथरी। लेकिन सिर्फ़ पेशाब देखकर यह नहीं बताया जा सकता कि कारण क्या है। इसलिए पेशाब में खून की जाँच हमेशा यूरोलॉजिस्ट से करानी चाहिए, भले ही यह सिर्फ़ एक बार हुआ हो और फिर रुक गया हो।
इस लेख में बताया गया है कि हीमेच्यूरिया क्या है, इसके आम कारण क्या हैं, किन संकेतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, और यूरोलॉजिस्ट कौन-सी जाँचें करा सकते हैं।
हीमेच्यूरिया क्या है?
हीमेच्यूरिया का मतलब है पेशाब में खून। यह दो तरह का होता है:
- दिखने वाला (ग्रॉस) हीमेच्यूरिया: पेशाब गुलाबी, लाल, कोला जैसा दिखता है या उसमें थक्के होते हैं।
- माइक्रोस्कोपिक हीमेच्यूरिया: पेशाब सामान्य दिखता है, लेकिन जाँच में लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC) मिलती हैं, अक्सर किसी सामान्य हेल्थ चेक-अप में।
दिखने वाले हीमेच्यूरिया में किसी गंभीर कारण की संभावना ज़्यादा होती है और इसकी जाँच जल्दी होनी चाहिए। माइक्रोस्कोपिक हीमेच्यूरिया की भी जाँच ज़रूरी है, ख़ासकर 35–40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों और धूम्रपान करने वालों में।
पेशाब में खून के आम कारण
| कारण | आम पहचान |
|---|---|
| पेशाब का इन्फ़ेक्शन (UTI) | जलन, बार-बार पेशाब, जल्दी लगना, बुख़ार |
| किडनी या यूरेटर की पथरी | बग़ल या जाँघ के जोड़ में तेज़ दर्द जो लहरों में आता है |
| प्रोस्टेट का बढ़ना (BPH) | बुज़ुर्ग पुरुष, कमज़ोर धार, रात में पेशाब के लिए उठना |
| ब्लैडर कैंसर | अक्सर बिना दर्द का खून, जो आता-जाता रहता है |
| किडनी कैंसर | बिना दर्द का खून, कभी बग़ल में दर्द या गाँठ |
| अपर ट्रैक्ट (यूरेटर / रीनल पेल्विस) कैंसर | बिना दर्द का खून, कभी बग़ल में दर्द |
| प्रोस्टेट कैंसर (कम बार) | आमतौर पर पेशाब की दूसरी तकलीफ़ों के साथ |
| किडनी की बीमारी (ग्लोमेरुलर कारण) | पेशाब में प्रोटीन, सूजन, हाई ब्लड प्रेशर |
| हाल में भारी व्यायाम, कैथेटर या कोई प्रक्रिया | अस्थायी; दोबारा जाँच में ठीक आना चाहिए |
कुछ खाने की चीज़ें (चुकंदर), दवाएँ (रिफ़ैम्पिसिन) और माहवारी भी पेशाब को लाल कर सकती हैं, जबकि असल में खून नहीं होता। पेशाब की एक साधारण जाँच से फ़र्क़ पता चल जाता है।
बिना दर्द के पेशाब में खून: ध्यान देना क्यों ज़रूरी है
जब पेशाब में खून के साथ जलन या दर्द हो, तो इन्फ़ेक्शन या पथरी की संभावना ज़्यादा होती है। बिना दर्द के दिखने वाला खून ब्लैडर कैंसर का सबसे आम पहला संकेत है। यह अक्सर एक बार आता है, हफ़्तों या महीनों के लिए गायब हो जाता है, और फिर लौट आता है। कई मरीज़ डॉक्टर को दिखाने में देर कर देते हैं क्योंकि खून "अपने-आप रुक गया"। इस देरी में शुरुआती, ठीक होने लायक ट्यूमर ब्लैडर की दीवार में और गहरा जा सकता है।
खून पतला करने वाली दवाएँ इसका कारण नहीं मानी जातीं। एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल या एंटीकोएगुलेंट लेने वालों में खून आसानी से निकल सकता है, लेकिन खून आमतौर पर किसी अंदरूनी समस्या से ही आता है। इसकी भी जाँच ज़रूरी है।
कैंसर का ज़्यादा ख़तरा किसे है?
यूरोलॉजिस्ट ज़्यादा सावधानी बरतेंगे अगर:
- उम्र 40 साल से ज़्यादा है
- धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं (ब्लैडर कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम)
- काम के दौरान डाई (रंग), रबर, चमड़ा, पेंट या रसायनों से संपर्क रहा है
- पहले पेल्विस में रेडिएशन या साइक्लोफ़ॉस्फ़ामाइड कीमोथेरेपी हुई है
- बार-बार पेशाब में खून दिखा है
- परिवार में यूरोलॉजिकल कैंसर रहा है
संबंधित: ब्लैडर कैंसर के जोखिम
कौन-सी जाँचें होंगी?
जाँच आमतौर पर जल्दी हो जाती है, और ज़्यादातर OPD में ही हो सकती है:
- पेशाब की रूटीन जाँच और कल्चर: खून की पुष्टि और इन्फ़ेक्शन की जाँच।
- यूरिन साइटोलॉजी: पेशाब में निकली कैंसर कोशिकाओं की तलाश (हाई ग्रेड ट्यूमर में उपयोगी)।
- किडनी फ़ंक्शन टेस्ट (क्रिएटिनिन), कॉन्ट्रास्ट स्कैन से पहले।
- इमेजिंग:
- पहली जाँच के रूप में किडनी और ब्लैडर का अल्ट्रासाउंड, या
- CT यूरोग्राफ़ी (कॉन्ट्रास्ट CT जो किडनी, यूरेटर और ब्लैडर को विस्तार से दिखाता है)। ज़्यादा जोखिम वाले वयस्कों में दिखने वाले खून के लिए यही बेहतर है।
- सिस्टोस्कोपी: लोकल एनेस्थीसिया में एक पतला कैमरा ब्लैडर में डाला जाता है, आमतौर पर कुछ मिनट लगते हैं। ब्लैडर ट्यूमर देखने या उसे ख़ारिज करने का यह सबसे भरोसेमंद तरीका है; स्कैन में छोटे, सपाट घाव छूट सकते हैं।
अगर ब्लैडर में ट्यूमर मिलता है, तो अगला कदम आमतौर पर TURBT (ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ़ ब्लैडर ट्यूमर) होता है, जिसमें ट्यूमर निकाला जाता है और जाँच के लिए ऊतक मिलता है।
संबंधित: TURBT
अगर स्कैन में किडनी में गाँठ दिखे, तो यूरोलॉजिस्ट बताएँगे कि वह कैंसर जैसी दिखती है या नहीं, और क्या विकल्प हैं।
संबंधित: पार्शियल बनाम रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी
यूरोलॉजिस्ट को तुरंत कब दिखाएँ?
तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ अगर:
- पेशाब में खून के थक्के हैं, या थक्कों की वजह से पेशाब करने में दिक़्क़त है
- बहुत ज़्यादा खून, चक्कर या कमज़ोरी है
- पेशाब में खून के साथ बुख़ार है
- पेशाब में खून के साथ बग़ल में तेज़ दर्द है
- पेशाब में खून के साथ वज़न घटना, भूख न लगना या हड्डियों में दर्द है
इनमें से कोई लक्षण न हो, तब भी बिना दर्द के दिखने वाले खून की एक बार की घटना की जाँच भी कुछ हफ़्तों के अंदर करानी चाहिए, महीनों बाद नहीं।
अच्छी ख़बर: जल्दी पहचान से फ़र्क़ पड़ता है
ज़्यादातर ब्लैडर कैंसर तब पकड़ में आते हैं जब वे मांसपेशी तक नहीं पहुँचे होते, यानी ब्लैडर की अंदरूनी परत तक सीमित होते हैं। इस अवस्था में अक्सर एंडोस्कोपिक सर्जरी (TURBT) और ब्लैडर में दवा डालकर इलाज हो जाता है, ब्लैडर निकाले बिना। जल्दी पकड़े गए छोटे किडनी कैंसर का इलाज अक्सर पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी से हो सकता है, जिसमें सिर्फ़ ट्यूमर निकाला जाता है और किडनी बच जाती है।
संबंधित: किडनी कैंसर
जल्दी डॉक्टर को दिखाना ही किडनी और ब्लैडर बचाने वाले इन विकल्पों को संभव बनाता है।
परामर्श
यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अंशुमान सिंह सोमवार से शुक्रवार यूरो-ऑन्कोलॉजी OPD, चंदन हॉस्पिटल (सुबह 10 – शाम 4) और Uro-Onco Connect, गोमती नगर (शाम 6 – रात 9) में मरीज़ देखते हैं, और वीडियो परामर्श भी देते हैं। रिपोर्ट और स्कैन पहले से भेजे जा सकते हैं। परामर्श बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पेशाब में खून हमेशा कैंसर होता है?
नहीं। इन्फ़ेक्शन, पथरी और प्रोस्टेट का बढ़ना ज़्यादा आम कारण हैं। लेकिन ब्लैडर और किडनी कैंसर से भी ऐसा हो सकता है, इसलिए पेशाब में दिखने वाले खून की हर घटना की जाँच यूरोलॉजिस्ट से करानी चाहिए।
पेशाब में खून अपने-आप रुक गया। क्या फिर भी जाँच ज़रूरी है?
हाँ। ब्लैडर ट्यूमर से आने वाला खून अक्सर रुकता है और फिर लौट आता है। खून रुक जाने का मतलब यह नहीं कि उसका कारण ख़त्म हो गया।
क्या सिस्टोस्कोपी में दर्द होता है?
फ़्लेक्सिबल सिस्टोस्कोपी लोकल एनेस्थेटिक जेली लगाकर होती है और आमतौर पर कुछ मिनट लगते हैं। ज़्यादातर मरीज़ इसे दर्द नहीं, बल्कि हल्की असुविधा बताते हैं।
क्या खून पतला करने की दवा से पेशाब में खून आ सकता है?
ये दवाएँ खून को ज़्यादा दिखने लायक बना सकती हैं, लेकिन अकेले शायद ही इसका कारण होती हैं। अंदरूनी कारण की जाँच फिर भी ज़रूरी है। डॉक्टर से बात किए बिना खून पतला करने की दवा बंद न करें।
पेशाब में खून के लिए सबसे अच्छी जाँच कौन-सी है?
कोई एक जाँच नहीं है। पेशाब की जाँच, इमेजिंग (अल्ट्रासाउंड या CT यूरोग्राफ़ी) और सिस्टोस्कोपी को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि हर जाँच मूत्र-मार्ग के अलग हिस्से को देखती है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; यह डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं है।