
ज़्यादातर ब्लैडर कैंसर तब पकड़ में आते हैं जब वे ब्लैडर की अंदरूनी परत तक ही सीमित होते हैं। इन्हें नॉन-मसल-इनवेसिव (मांसपेशी तक न पहुँचे) ट्यूमर कहते हैं और TURBT (ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ़ ब्लैडर ट्यूमर) से मूत्रनली के रास्ते निकाला जाता है, बिना किसी चीरे के। इन ट्यूमर में मुख्य समस्या फैलना नहीं, बल्कि दोबारा होना है: आगे इलाज के बिना कई ट्यूमर ब्लैडर की परत में लौट आते हैं।
ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर में इस ख़तरे को कम करने का सबसे असरदार इलाज BCG (बैसिलस काल्मेट-गुएरिन) है। इसे एक पतले कैथेटर से सीधे ब्लैडर में डाला जाता है, इसलिए यह ब्लैडर की परत पर असर करता है और शरीर के बाक़ी हिस्से तक बहुत कम पहुँचता है। यह गाइड बताती है कि BCG किसे चाहिए, हर सेशन में क्या होता है, और घर पर कैसे संभालें।
BCG क्या है और कैसे काम करता है
BCG एक कमज़ोर किया हुआ बैक्टीरिया है जो मूल रूप से टीबी के टीके के लिए इस्तेमाल होता था। ब्लैडर में डालने पर यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को जगाता है, जो ब्लैडर की परत में मौजूद कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती है। यह कीमोथेरेपी नहीं है, और इसे टीका लगाने के लिए नहीं दिया जाता।
सही तरीके से दिया गया BCG ट्यूमर के लौटने की संभावना कम करता है, और सबसे अहम, उसके ब्लैडर की मांसपेशी तक पहुँचने की संभावना भी, जिसका मतलब आमतौर पर ब्लैडर निकालना होता।
BCG किसे चाहिए?
फ़ैसला TURBT के बाद की पैथोलॉजी रिपोर्ट पर निर्भर करता है: ट्यूमर का ग्रेड, स्टेज, आकार और संख्या, और कार्सिनोमा इन सीटू (CIS) है या नहीं।
| जोखिम समूह | आम पहचान | TURBT के बाद आमतौर पर इलाज |
|---|---|---|
| कम | एक, छोटा, लो ग्रेड Ta ट्यूमर | ब्लैडर में कीमोथेरेपी की एक खुराक, फिर जाँच के लिए सिस्टोस्कोपी |
| मध्यम | लो ग्रेड लेकिन कई, बड़े या दोबारा हुए ट्यूमर | ब्लैडर में कीमोथेरेपी का कोर्स, या एक साल BCG |
| ज़्यादा | हाई ग्रेड ट्यूमर, स्टेज T1, या CIS | तीन साल तक BCG |
T1 या हाई ग्रेड ट्यूमर में BCG शुरू करने से पहले, पहले ऑपरेशन के 2 से 6 हफ़्ते बाद आमतौर पर दूसरा TURBT किया जाता है। इससे पक्का होता है कि कोई ट्यूमर बचा नहीं है और मांसपेशी तक नहीं पहुँचा है।
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शेड्यूल: इंडक्शन और मेंटेनेंस
- इंडक्शन: BCG आमतौर पर TURBT के 2 से 4 हफ़्ते बाद शुरू होता है, जब ब्लैडर भर जाए, और छह हफ़्ते तक हफ़्ते में एक बार दिया जाता है।
- पहली जाँच: शुरू करने के लगभग तीन महीने बाद सिस्टोस्कोपी, अक्सर यूरिन साइटोलॉजी के साथ।
- मेंटेनेंस: अगर ब्लैडर साफ़ है, तो BCG छोटे कोर्स में जारी रहता है, तीन हफ़्ते तक हफ़्ते में एक खुराक, आमतौर पर 3, 6 और 12 महीने पर, और फिर हर छह महीने। ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर में तीन साल तक और मध्यम जोखिम वाले ट्यूमर में एक साल तक इलाज होता है।
मेंटेनेंस ज़रूरी है। सिर्फ़ छह हफ़्ते का कोर्स इंडक्शन और मेंटेनेंस दोनों की तुलना में कम सुरक्षा देता है। अगर साइड इफ़ेक्ट की वजह से पूरा शेड्यूल मुश्किल हो, तो अक्सर इलाज रोकने की बजाय खुराक या संख्या बदली जा सकती है।
हर सेशन में क्या होता है
हर सेशन OPD या डे-केयर में लगभग 15 मिनट का होता है, इसके बाद घर पर या अस्पताल में इंतज़ार।
- आने से पहले: लगभग चार घंटे पहले से पानी कम पिएँ, ताकि पेशाब BCG को पतला न करे। दवा डालने से ठीक पहले ब्लैडर ख़ाली कर दें।
- इन्फ़ेक्शन की जाँच के लिए पेशाब की जाँच हो सकती है।
- एक पतला, चिकना कैथेटर ब्लैडर में डाला जाता है, BCG का घोल अंदर जाता है, और कैथेटर तुरंत निकाल दिया जाता है।
- दो घंटे तक पेशाब रोककर रखें, फिर बैठकर पेशाब करें।
- इसके बाद दिन भर ख़ूब पानी पिएँ ताकि ब्लैडर साफ़ हो जाए।
अगर पेशाब में इन्फ़ेक्शन हो, पेशाब में दिखने वाला खून हो, या कैथेटर डालना मुश्किल रहा हो या उससे खून आया हो, तो दवा टाल दी जाती है। इनसे BCG के खून में पहुँचने का ख़तरा बढ़ता है।
घर पर सावधानियाँ
हर खुराक के लगभग छह घंटे बाद तक पेशाब में जीवित BCG रहता है।
- पुरुष और महिलाएँ दोनों बैठकर पेशाब करें, ताकि छींटे न पड़ें।
- ढक्कन बंद करके टॉयलेट दो बार फ़्लश करें।
- पेशाब करने के बाद हाथ और जननांग साबुन-पानी से धोएँ।
- हर खुराक के बाद एक हफ़्ते तक यौन संबंध में कंडोम का इस्तेमाल करें, या इस दौरान यौन संबंध से बचें।
- इलाज के दौरान गर्भधारण से बचें।
ब्लैडर में दिया गया BCG आपके परिवार को टीबी नहीं देता, और आपको उनसे अलग रहने की ज़रूरत नहीं है।
साइड इफ़ेक्ट
ज़्यादातर लोग BCG अच्छी तरह सह लेते हैं, हालाँकि कोर्स के साथ साइड इफ़ेक्ट अक्सर बढ़ते हैं।
आम और अपेक्षित (आमतौर पर 48 घंटे में ठीक):
- पेशाब में जलन, और बार-बार व जल्दी पेशाब लगना
- पेशाब में थोड़ा खून
- एक-दो दिन थकान, हल्का बुख़ार (38.5 °C से कम) और फ़्लू जैसा बदन दर्द
ख़ूब पानी और पैरासिटामॉल जैसी साधारण दर्द की दवा मदद करती है। अगली विज़िट पर टीम को बताएँ, क्योंकि इन्हीं से अगली खुराक की योजना बनती है।
तुरंत अस्पताल से संपर्क करें अगर:
- 38.5 °C से ज़्यादा बुख़ार हो, या कोई भी बुख़ार 48 घंटे से ज़्यादा रहे
- कँपकँपी हो, या बहुत बीमार महसूस हो
- जोड़ों में दर्द व सूजन, आँख में दर्द या लालिमा, या अंडकोष में दर्द व सूजन हो
- नई खाँसी या साँस फूलना हो
- पेशाब न हो पाए, या थक्कों के साथ बहुत ज़्यादा खून आए
ये ब्लैडर के बाहर BCG इन्फ़ेक्शन के संकेत हो सकते हैं। ऐसा बहुत कम होता है, लेकिन इसमें टीबी की दवाओं से तुरंत इलाज ज़रूरी है।
BCG किसे नहीं देना चाहिए?
BCG उपयुक्त नहीं हो सकता अगर आप:
- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले हैं, जैसे स्टेरॉइड या इम्यूनिटी दबाने वाली दवाएँ लेने से, अंग प्रत्यारोपण से, या कम CD4 वाले HIV से
- अभी सक्रिय टीबी से पीड़ित हैं
- गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं
इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और बीमारियों के बारे में बताएँ।
जब BCG उपलब्ध न हो
भारत और कई दूसरे देशों में समय-समय पर BCG की कमी होती रही है। अगर BCG न मिले, तो असरदार विकल्पों में कम खुराक वाला BCG शेड्यूल या ब्लैडर में कीमोथेरेपी के कोर्स शामिल हैं, जैसे जेमसिटाबीन, कभी-कभी डोसेटैक्सेल के साथ। इलाज की योजना ऐसे बनाई जा सकती है कि इंतज़ार के दौरान सुरक्षा कम न हो।
अगर BCG काम न करे
अगर पूरा BCG लेने के बाद भी हाई ग्रेड ट्यूमर या CIS लौट आए, तो बीमारी को BCG-अनरिस्पॉन्सिव कहते हैं। इन ट्यूमर के मांसपेशी तक पहुँचने का ख़तरा ज़्यादा होता है, इसलिए आमतौर पर रोबोटिक रेडिकल सिस्टेक्टॉमी (ब्लैडर निकालना) की सलाह दी जाती है। जो मरीज़ सर्जरी के लायक नहीं हैं या सर्जरी नहीं चाहते, उनके लिए ब्लैडर बचाने वाले नए इलाज इस्तेमाल हो रहे हैं।
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BCG के बाद फ़ॉलो-अप
सफल इलाज के बाद भी नॉन-मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर में नियमित सिस्टोस्कोपी ज़रूरी है: आमतौर पर पहले दो साल हर तीन महीने, फिर कम बार। किडनी और यूरेटर की समय-समय पर इमेजिंग होती है, क्योंकि उसी तरह का कैंसर कभी-कभी वहाँ भी हो सकता है। धूम्रपान छोड़ना कैंसर के लौटने की संभावना कम करने का सबसे असरदार तरीका है।
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परामर्श
यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अंशुमान सिंह TURBT, BCG और रोबोटिक सर्जरी से ब्लैडर कैंसर का इलाज करते हैं। वे सोमवार से शुक्रवार यूरो-ऑन्कोलॉजी OPD, चंदन हॉस्पिटल (सुबह 10 – शाम 4) और Uro-Onco Connect, गोमती नगर (शाम 6 – रात 9) में मरीज़ देखते हैं, और वीडियो परामर्श भी देते हैं। TURBT की पैथोलॉजी रिपोर्ट और सिस्टोस्कोपी के नतीजे पहले से भेजे जा सकते हैं। परामर्श बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्लैडर कैंसर में BCG इलाज में दर्द होता है?
दवा डालने में कुछ मिनट लगते हैं और यह कैथेटर डालने जैसा लगता है। उसके बाद एक-दो दिन जलन और बार-बार पेशाब आम है, जो आमतौर पर पानी और साधारण दर्द की दवा से ठीक हो जाता है।
BCG इलाज कितने समय चलता है?
इंडक्शन छह हफ़्ते तक हफ़्ते में एक बार होता है। ज़्यादा जोखिम वाले ट्यूमर में इसके बाद तीन-तीन हफ़्ते के मेंटेनेंस कोर्स होते हैं, आमतौर पर 3, 6 और 12 महीने पर और फिर हर छह महीने, तीन साल तक।
BCG के बाद पेशाब कितनी देर रोकना चाहिए?
दो घंटे तक, फिर बैठकर पेशाब करें। इसके बाद दिन भर ख़ूब पानी पिएँ।
क्या BCG इलाज के दौरान मेरे परिवार को टीबी हो सकती है?
नहीं। ब्लैडर में दिया गया BCG परिवार के सदस्यों को टीबी नहीं देता। हर खुराक के लगभग छह घंटे बाद तक बैठकर पेशाब करें, दो बार फ़्लश करें और हाथ धोएँ, और हर खुराक के बाद एक हफ़्ते तक कंडोम इस्तेमाल करें।
ब्लैडर कैंसर में BCG कितना सफल है?
ज़्यादा जोखिम वाले नॉन-मसल-इनवेसिव ट्यूमर में मेंटेनेंस के साथ BCG ब्लैडर का सबसे असरदार इलाज है। यह ट्यूमर के लौटने या मांसपेशी तक पहुँचने की संभावना काफ़ी कम करता है, और ज़्यादातर मरीज़ों का ब्लैडर बचा रहता है।
अगर BCG फ़ेल हो जाए तो क्या होता है?
अगर पूरा BCG लेने के बाद भी हाई ग्रेड कैंसर लौट आए, तो आमतौर पर ब्लैडर निकालने (रेडिकल सिस्टेक्टॉमी, अक्सर रोबोटिक) की सलाह दी जाती है। सर्जरी के लायक न होने वाले मरीज़ों के लिए ब्लैडर बचाने वाली नई दवाएँ विकल्प हो सकती हैं।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; यह डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं है।