
जब स्कैन में किडनी में ट्यूमर दिखता है, तो ज़्यादातर मरीज़ मान लेते हैं कि पूरी किडनी निकालनी पड़ेगी। आज अक्सर ऐसा नहीं होता। कई किडनी कैंसर, ख़ासकर जल्दी पकड़े गए छोटे कैंसर में, सर्जन सिर्फ़ ट्यूमर निकालकर बाक़ी किडनी बचा सकते हैं। इस ऑपरेशन को पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी कहते हैं।
इस लेख में बताया गया है कि पार्शियल और रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी में क्या फ़र्क़ है, कौन किसके लिए उपयुक्त है, रोबोटिक सर्जरी की क्या भूमिका है, और रिकवरी कैसी होती है।
दोनों ऑपरेशन एक नज़र में
| पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी | रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी | |
|---|---|---|
| क्या निकाला जाता है | ट्यूमर, आसपास के थोड़े सामान्य हिस्से के साथ | पूरी किडनी, आसपास की चर्बी के साथ (और कभी-कभी एड्रिनल ग्रंथि) |
| किडनी की कार्यक्षमता | किडनी का ज़्यादातर हिस्सा बच जाता है | एक किडनी बचती है |
| आमतौर पर किसके लिए | छोटे ट्यूमर (ख़ासकर 4 cm तक, अक्सर 7 cm तक), एक ही किडनी में ट्यूमर, किडनी की बीमारी वाले मरीज़ | बड़े ट्यूमर, किडनी के बीच में गहरे ट्यूमर, नसों में बढ़े ट्यूमर |
| सर्जरी की जटिलता | ज़्यादा: ट्यूमर निकालना और किडनी की मरम्मत | तकनीकी रूप से कम जटिल |
| ख़ास जोखिम | खून बहना, पेशाब का रिसाव | लंबे समय में किडनी की कार्यक्षमता घटने का जोखिम |
किडनी बचाना क्यों ज़रूरी है
एक स्वस्थ किडनी के साथ सामान्य जीवन जिया जा सकता है। लेकिन एक किडनी निकालने से किडनी की कुल कार्यक्षमता कम हो जाती है। जिन लोगों को पहले से, या आगे चलकर, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ हो, उनके लिए यह खोया हुआ रिज़र्व मायने रखता है।
छोटे ट्यूमर में पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी के बाद कैंसर पर नियंत्रण आमतौर पर पूरी किडनी निकालने के बराबर होता है, और किडनी की ज़्यादा कार्यक्षमता बचती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन (EAU, AUA) छोटे किडनी ट्यूमर में, जब भी तकनीकी रूप से सुरक्षित हो, पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी को पसंदीदा विकल्प मानती हैं।
पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी ख़ास तौर पर ज़रूरी है अगर:
- सिर्फ़ एक किडनी काम कर रही है
- दोनों किडनी में ट्यूमर हैं
- पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर है
- कोई पारिवारिक (आनुवंशिक) बीमारी है जिसमें किडनी में कई ट्यूमर हो सकते हैं
किडनी की हर गाँठ कैंसर नहीं होती
किडनी की लगभग हर पाँच में से एक छोटी गाँठ कैंसर नहीं (बिनाइन) निकलती है (जैसे ऑन्कोसाइटोमा या कम चर्बी वाला एंजियोमायोलिपोमा)। यह भी एक वजह है कि जहाँ संभव हो, किडनी के सामान्य हिस्से को बचाया जाए।
चुनाव कैसे होता है?
आपके यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट इन बातों पर विचार करते हैं:
- ट्यूमर का आकार: छोटे ट्यूमर आमतौर पर पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी के लिए उपयुक्त होते हैं।
- जगह: किडनी की बाहरी सतह के ट्यूमर निकालना आसान है; बीच में, मुख्य रक्त-नलियों या पेशाब इकट्ठा करने वाले हिस्से के पास के ट्यूमर कठिन होते हैं।
- स्कोरिंग सिस्टम (जैसे R.E.N.A.L. या PADUA), जो बताते हैं कि पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी कितनी जटिल होगी।
- फैलाव: रीनल वेन या इन्फ़ीरियर वेना कावा में, या आसपास के ऊतक में बढ़े ट्यूमर में आमतौर पर रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी चाहिए।
- आपकी किडनी की कार्यक्षमता और सामान्य सेहत।
- सर्जन का अनुभव: जटिल पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी अनुभवी हाथों में सबसे अच्छी होती है।
कुछ बहुत छोटे ट्यूमर में, ख़ासकर बुज़ुर्गों या गंभीर बीमारियों वाले मरीज़ों में, एक्टिव सर्विलांस (नियमित स्कैन) या एब्लेशन (गर्मी या ठंडक से ट्यूमर नष्ट करना) भी विकल्प हो सकते हैं।
रोबोटिक सर्जरी की भूमिका
आज किडनी कैंसर के ज़्यादातर ऑपरेशन कीहोल (मिनिमली इनवेसिव) सर्जरी से हो सकते हैं, लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक।
पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी में रोबोटिक सर्जरी ख़ास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि सर्जन को:
- ट्यूमर को साफ़ किनारे के साथ सटीकता से निकालना होता है
- किडनी में खून का बहाव नियंत्रित करना होता है, अक्सर थोड़ी देर के लिए क्लैंप लगाकर
- किडनी को जल्दी सिलना होता है, ताकि किडनी कम से कम समय खून की आपूर्ति के बिना रहे
रोबोट का बड़ा करके दिखने वाला 3D दृश्य और कलाई की तरह घूमने वाले उपकरण इस सटीक काटने और सिलने को आसान बनाते हैं, जिससे ज़्यादा मरीज़ अपनी किडनी बचा सकते हैं।
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रिकवरी कैसी होती है?
रिकवरी अलग-अलग होती है, लेकिन मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बाद ज़्यादातर मरीज़:
- सर्जरी वाले दिन या अगले दिन चलने लगते हैं
- 24 घंटे के अंदर पानी और खाना शुरू कर देते हैं
- लगभग 2–4 दिन अस्पताल में रहते हैं
- 2–3 हफ़्तों में डेस्क वाले काम और हल्की गतिविधियों पर लौट आते हैं
- लगभग 4–6 हफ़्ते भारी वज़न उठाने और ज़ोरदार व्यायाम से बचते हैं
पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी के बाद पहले कुछ हफ़्तों में पेशाब में खून, बग़ल में दर्द, चक्कर या बुख़ार पर ध्यान रखें। कभी-कभी मरम्मत की गई किडनी से खून बह सकता है, जिस पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी है।
सर्जरी के बाद फ़ॉलो-अप
अंतिम हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट से ट्यूमर का प्रकार, ग्रेड, स्टेज और मार्जिन साफ़ हैं या नहीं, इसकी पुष्टि होती है। इसके बाद ज़्यादातर मरीज़ों का समय-समय पर स्कैन और किडनी फ़ंक्शन टेस्ट से फ़ॉलो-अप होता है। कितनी बार, यह ट्यूमर के जोखिम पर निर्भर करता है। ज़्यादा जोखिम वाले कुछ मरीज़ों को सर्जरी के बाद एडजुवेंट (बचाव वाली) थेरेपी दी जा सकती है।
परामर्श
यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अंशुमान सिंह सोमवार से शुक्रवार यूरो-ऑन्कोलॉजी OPD, चंदन हॉस्पिटल (सुबह 10 – शाम 4) और Uro-Onco Connect, गोमती नगर (शाम 6 – रात 9) में मरीज़ देखते हैं, और वीडियो परामर्श भी देते हैं। रिपोर्ट और स्कैन पहले से भेजे जा सकते हैं। परामर्श बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या किडनी निकाले बिना किडनी कैंसर निकाला जा सकता है?
हाँ। कई छोटे और कुछ मध्यम आकार के किडनी ट्यूमर पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी से निकाले जा सकते हैं, जिसमें बाक़ी किडनी बच जाती है।
क्या कैंसर नियंत्रण के लिए पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी पूरी किडनी निकालने जितनी सुरक्षित है?
सही ट्यूमर में, ख़ासकर छोटे ट्यूमर में, लंबे समय तक कैंसर पर नियंत्रण आमतौर पर बराबर रहता है, और किडनी की कार्यक्षमता बेहतर बचती है।
क्या एक किडनी के साथ सामान्य जीवन जी सकते हैं?
ज़्यादातर लोग एक स्वस्थ किडनी के साथ सामान्य जीवन जीते हैं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और किडनी फ़ंक्शन की जाँच की सलाह दी जाती है।
रोबोटिक नेफ्रेक्टॉमी के बाद अस्पताल में कितने दिन रहना पड़ता है?
आमतौर पर 2–4 दिन, और 2–3 हफ़्तों में हल्की गतिविधियों पर वापसी।
रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कब ज़रूरी होती है?
जब ट्यूमर बड़ा हो, बीच में हो, रीनल वेन या आसपास के ऊतक तक पहुँचा हो, या जब पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी सुरक्षित न हो या उसके बाद काम करने लायक किडनी बहुत कम बचे।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; यह डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं है।